कलवारी CHC का ‘कमीशन’ तंत्र: सरकारी दवा स्टोर में, डॉक्टर साहब का ध्यान बाहर की दुकानों पर!
गरीबों की जेब पर डॉक्टर का 'सर्जिकल स्ट्राइक': कलवारी CHC में इलाज के नाम पर खुली लूट। अस्पताल की ओपीडी या मेडिकल स्टोर का दलाल? डॉक्टर रितेश पर मरीजों को लूटने का गंभीर आरोप।
अजीत मिश्रा (खोजी)
स्वास्थ्य व्यवस्था का ‘कलवारी’ कांड: डॉक्टर की ‘बाहरी’ कमाई के आगे बेबस गरीब मरीज
- सरकारी इलाज, प्राइवेट का पर्चा: कलवारी स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं का ‘दमन’।
- ‘दवा’ सरकारी, ‘फायदा’ प्राइवेट: कब नकेल कसेगा स्वास्थ्य विभाग?
कलवारी CHC: डॉक्टर साहब की मनमानी, गरीब मरीज परेशान।मुफ्त इलाज का ढोंग: बाहर की दवा लिखने को मजबूर डॉक्टर रितेश। कलवारी में ‘बाहरी’ दवाओं का खेल, कमीशन के लिए मरीजों का शोषण।
बस्ती। सरकारें सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और मुफ़्त दवाओं का दम भरती हैं, लेकिन कलवारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ये दावे कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। यहाँ तैनात डॉक्टर रितेश का ‘प्रिस्क्रिप्शन’ मरीजों के लिए मरहम नहीं, बल्कि उनकी जेब पर सीधा डाका बन गया है। अस्पताल के भीतर सरकारी दवाइयों का भरपूर स्टॉक होने के बावजूद, मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों का रास्ता दिखाने का खेल खुलेआम चल रहा है।
पेट दर्द का बहाना, बाहर से मंगाने का ठिकाना
आरोप है कि सामान्य से सामान्य बीमारी—जैसे गैस, पेट दर्द या सिरदर्द—के लिए आने वाले मरीजों को भी सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं। सवाल यह है कि यदि अस्पताल में दवा उपलब्ध है, तो उसे मरीजों को क्यों नहीं दिया जा रहा? क्या डॉक्टर साहब का निजी कमीशन सरकारी दवाओं के स्टॉक से बड़ा हो गया है?
गरीबों की थाली पर डाका
कलवारी और उसके आसपास के गांवों से आने वाले अधिकांश मरीज गरीब और मजदूर वर्ग के हैं। जो व्यक्ति अपनी दिहाड़ी मजदूरी जोड़कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करता है, उसके लिए सरकारी अस्पताल में भी प्राइवेट पर्चा थमाया जाना किसी क्रूर मजाक से कम नहीं है। डॉक्टर की इस मनमानी के कारण जरूरतमंद मरीजों को अपना इलाज छोड़कर या तो कर्ज लेना पड़ रहा है, या फिर बिन इलाज वापस लौटना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी: क्या कार्रवाई या मिलीभगत?
यह पहली बार नहीं है जब कलवारी CHC पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या उच्च अधिकारियों को इस ‘बाहरी खेल’ की भनक नहीं है? या फिर इस कमीशनखोरी के तंत्र में ऊपर से नीचे तक सब शामिल हैं?
स्थानीय लोगों की दो टूक मांग:
- डॉक्टर रितेश के पिछले महीनों के पर्चों की गहन जांच हो।
- इस बात का ऑडिट हो कि अस्पताल में दवाएं क्यों नहीं बांटी गईं।
- मरीजों को लूटने वाले ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो।
अगर स्वास्थ्य विभाग अब भी नहीं जागा, तो यह स्पष्ट है कि कलवारी का यह अस्पताल जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि चंद लोगों की जेबें भरने के लिए खोला गया है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, सख्त कार्रवाई चाहती है।








